मैं का टूटना... हम हो जाना..... दर्द है !!

सागरनामा मैं का टूटना हम हो जाना दर्द है तपती सांकल की तरह ना छुअन की संभावना ना ही खुल जाने की आस बंद होती हथेली पर पूर्ण और अपूर्ण के दरम्यान भीड़ सा हो जाने का अहसास सर उठाता है .. चुभता रहता है तीखी किरचों की तरह एकाकीपन आँख बंद करता है ( अंधों से परिचय भ... [पूरी पोस्ट]
writer सागर
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[09 Oct 2009 12:00 PM]

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