"ये क्या है ?"
आज उस बूढे ने आपनी जिंदगी भर में ऐसा अपमान शायद आज पहली बार सहा था । वह कोई बहुत अमीर तो नही था लेकिन mehnat और स्वाभिमान की अटूट पूँजी उसके पास थी । आँखे मारे थकान के बोझिल हो गई थी । बंद होती आँखों में गुज़रा ज़माना याद आने लगा जब वह अपने बेटे को कंध...
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Saiyed Faiz Hasnain
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[09 Oct 2009 03:51 AM]



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