हिन्दी ग़ज़ल

अमरेन्द्र कुमार - हिन्दी राइटर्स गिल्ड हुस्न के जो ये नज़ारे नहीं होते हम ये दिल कभी हारे नहीं होते। चढ जाते जो सबके होठों पर वो गीत फिर कंवारे नहीं होते। तमाम नफ़रतों के बलबलों में इश्क करने वाले सारे नहीं होते। मात खायी है हमने तो हर्ज़ नहीं प्यार करने वाले बेचारे नहीं होते। जो जगमगाते हरद... [पूरी पोस्ट]
writer अमरेन्द्र:
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[07 Oct 2009 01:14 AM]

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