नोनू भटका मेले में (कहानी)
कुछ महीनों पहले एक मेला देखने नोनू अपने माता- पिता के साथ गया। मेले जाने के पहले माँ ने उसे समझाया, 'देखो उँगली पकड़कर चलना। मेले में बहुत भीड़ होती है। यदि उँगली छोड़ी और भटक गए तो फिर परेशानी होगी और देखो यदि साथ छूट ही जाए तो रोना मत। तुम्हारे जेब मे...
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सत्यनारायण भटनागर
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[09 Oct 2009 06:05 AM]



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