आकाश को देखने का समय निकालिए

श्री सत्यनारायण भटनागर जी का पन्ना हम धरती को माँ की तरह पूजते हैं। उसके प्राकृतिक सौंदर्य को देख गदगद हो जाते हैं, पर हमारी दृष्टि आकाश की ओर कभी-कभी ही जाती है। आकाश भी हमारी प्रकृति का अंग है। यदि आप आकाश की ओर निहारें तो उसमें बनने वाले रंग-बिरंगे चित्रों को देखकर सब कुछ भूल जाएं।... [पूरी पोस्ट]
writer सत्यनारायण भटनागर
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[12 Oct 2009 02:39 AM]

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