घर जला भाई का भाई से बुझाया न गया
इंसानी फितरत का भी कोई जवाब नहीं. जब, जिस हाल में रहे, उस समय,काल और हाल की शिकायत किए बिना रहा नहीं जाता. अब आप आज की हालत देखें. मुझ जैसे उम्र-रसीदा लोग नए ज़माने के नए माहौल,नए दौर की ऐसे धज्जियां उड़ाने को तुले रहते हैं कि बस अल्लाह रहम करे. सच तो...
[पूरी पोस्ट]
raajkumar keswani
8
0
0
0
0
[07 Oct 2009 07:52 AM]



Shuffle








