'आई-जेनरेशन' = 'इंस्टालमेंट जेनरेशन'
छोटी के बदले बड़ी चादर का एक्सचेंज ऑफर हो और शेष धनराशि आसान किश्तों में चुकाने की सुविधा, तो 'अपनी चादर देख कर पाँव पसारने' की कहावत भला किसको याद रहेगी? कम से कम दोहरी कमाई वाले भारतीय शहरी दंपतियों की युवा पीढ़ी को तो बिल्कुल नहीं, जिन पर टिकी हैं...
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शिवम् मिश्रा
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[10 Oct 2009 04:03 AM]



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