तुम्हें मेरी आँखों में क्या दीखता है ...
कुछ खोजती हुई सी आँखों से उसने अनिमेष को देखा. पुराने दिनों की याद हो आई, धुंधली और संक्षिप्त यादें. जिनमें रेत के उड़ते हुए बगुले थे, धूप में साए थे मगर बहुत छोटे, नौजवान लड़के थे अपनी बाईक पर गरम हवा को पछाड़ते, दोस्ती को ज़िन्दा रखने के लिए स्कूल की...
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Kishore Choudhary
दिल-ए-नाकाम
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[14 Oct 2009 10:25 AM]



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