राष्ट्रीय पर्व से ड्राई-डे का सफ़र..(भाग-१)

मैनें आहुति बनकर देखा.. आज उस शख्स पर कुछ लिखने का मन कर रहा है, जो व्यक्तित्व की सीमाओं से परे उठकर एक विचारधारा, एक ‘वाद’ बन चुका है। जिसे दो महाद्वीपों की जनता ने एक काल में पूजा, दो देशों की संसदों ने जिसे धर्म प्रचारकों ईसा, हजरत, बुद्ध के बाद गुजरी सहस्राब्दि तक का सब... [पूरी पोस्ट]
writer कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra)

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[06 Oct 2009 03:12 AM]

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