’राइफल’ एक छोटी कविता

जनशब्द राइफलें जो किसी पत्ते की खड़खड़ाहट कि दिशा में तड़-तड़ा उठी थीं और किसी संकट को टाल देने की विजय मुद्रा में चाहता था राइफलधारी मुस्कुराना जिसे बड़े ही ध्यान से देख रहा था पत्ते की ओट से एक चूहा ! -अरविन्द श्रीवास्तव , मधेपुरा... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द श्रीवास्तव

राइफल

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[06 Oct 2009 07:48 AM]

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