किसी को याद है....हठकर बैठा चांद

उनींदरा बचपन अपने साथ बहुत सारी चीजें ले जाता है, जैसे ये कविता- हठकर बैठा चांद एक दिन माता यह बोला, सिलवा दे मुझे भी ऊन का मोटा एक झिंगोला... .अगर किसी के पास है पूरी कविता तो प्‍लीज भेज दें, काफी दिन से मैं इसे ढूंढ रही हूं। मुझे सिर्फ इतनी याद है.. हठकर ब... [पूरी पोस्ट]
writer शायदा
views
5
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[12 Oct 2009 10:08 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix