फिर किसी से दिल लगाया जाएगा

भीगी गज़ल अब नया दीपक जलाया जाएगा फिर किसी से दिल लगाया जाएगा चाँद गर साथी न मेरा बन सके साथ सूरज का निभाया जाएगा रस्म-ए-रुखसत को निभाने के लिए फूल आँखों का चढ़ाया जाएगा कर भला कितना भी दुनिया में मगर मरने पे ही बुत बनाया जाएगा आईना सूरत बदलने जब लगे ख़ुद को फ... [पूरी पोस्ट]
writer श्रद्धा जैन

Shrddha Jain

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[10 Oct 2009 13:32 PM]

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