निकल आते हैं आंसू हंसते-हंसते,ये किस गम की कसक है हर खुशी में .

Shreesh UVACH निदा फाज़ली की नज्में कुछ इस तरह चर्चित हैं कि अपने आस-पास साधारण, सामान्य हर तरह का आदमी उनकी पंक्तियाँ कह रहा होता है पर अक्सर सुनाने वाले और सुनने वाले दोनों को ही पता नहीं होता कि ये निदा फाज़ली की लाइनें हैं...निदा फाज़ली उन चुनिन्दा लोगों में श... [पूरी पोस्ट]
writer श्रीश पाठक 'प्रखर'
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[12 Oct 2009 16:06 PM]

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