व्यंग्यजल भूत प्रेतों को भज रही दुनिया
व्यंग्जल भूत प्रेतों को भज रही दुनिया भूत प्रेतों को भज रही दुनिया आदमी से उलझ रही दुनिया हम भी गृह लक्ष्मी को ढोते हैं हम को उल्लू समझ रही दुनिया ऐसे आभुषणों के फैशन हैं बम मिसाइल से सज़ रही दुनिया उसकी ज़ुल्फों से होड लेती है जाने कब से सुलझ रही दुनि...
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वीरेन्द्र जैन
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[13 Oct 2009 07:55 AM]



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