निदा फाज़ली
बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यों नहीं जाता जो बीत गया है वो गुजर क्यों नहीं जाता सब कुछ तो है क्या ढूँढ्ती रहती हैं निगाहें क्या बात है मैं वक्त पे घर क्यों नही जाता वो एक ही चेहरा तो नही सारे जहाँ में जो दूर है वो दिल से उतर क्यो नही जाता मैं अपनी ही उलझी...
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sweet_dream
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[10 Oct 2009 01:33 AM]



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