योद्धा (कविता)

उपस्थित वो एक शानदार योद्धा था। मिटटी के अखाडे में उसका दर्प कभी खंडित नहीं हुआ था। पहलवानों की गुरु शिष्य परम्परा में अपनी तरह का अकेला ही आया था वो। चौंधियाते क्रिकेट मैदानों से बहुत दूर अखाडे के धूसर कोनों का लड़ाका अपनी सत्ता के महज कुछ क़दमों से नापे जा... [पूरी पोस्ट]
writer sanjay vyas
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[12 Oct 2009 09:49 AM]

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