कृपया हमारी बात का बुरा मत मानो!!

शुऐब पुराने ज़माने के ख़ुदाओं की मौज थी कि अशिक्षित लोगों मे आए और छागए। और पिछले ज़माने के लोगों का काम-धाम कुछ था नहीं बस यूंही बेकार बैठे रहते थे कि उन ख़ुदाओं पर अंधों के जैसा ईमान ले आए। और हमारी क़िस्मत देखो कि नये ज़माने के ख़ुदा हैं, ८० क़िस्तें होगई... [पूरी पोस्ट]
writer शुऐब
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[10 Oct 2009 03:27 AM]

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