कलजुग में राम नही बस रावण रावण

पदमराग कलजुग में रामायण नहीं बस रावण-रावणमियां मुसद्ïदी लाल तनतनाये हुये हमारी तरफ ही चले आ रहे थे। आपको बता दूं कि मियां मुसद्ïदी लाल हमारे पड़ोसी हैं और हमारे मुंह लगे मित्र भी। जब कभी भी सुबह के समाचार से उन्हें व्यभिचार, अत्याचार, फर्जी प्रचार या पंचरंग... [पूरी पोस्ट]
writer मनोज द्विवेदी
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[13 Oct 2009 02:46 AM]

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