बीच बाजारी इन नैनन से

पदमराग एक दिन सपने में खोया हुआ था। सपने में बस यूं ही सुबह के वक्त टहलने निकला तो सोचा कि चलो कुछ वर्जिस हो जायेगी और बाजार का हाल समाचार भी मिल जायेगा। कॉलोनी से कुछ ही दूर आया था कि किराने की दुकान पर मक्खी मार रहे दुकानदार को देखकर चौंक गया। यह वही दुका... [पूरी पोस्ट]
writer मनोज द्विवेदी
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[14 Oct 2009 10:20 AM]

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