साक्षात्कार
उसे जगाया गया था कच्ची नींद से इस एकाकी यात्रा के लिए आखिर उसके निर्निमेष पलकों में यही तो समाया था अनेकानेक वर्षों से अपना समस्त चेतन,शौर्य और निश्चय उस क्षण में उँडेलकर वह बढ़ने लगा कान नहीं थे उसके पास सवाल सुनने को और कदम अनुमति नहीं देते थे थम ज...
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धीर.
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[08 Oct 2009 00:33 AM]



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