विदेश मत जाओ पारो
मेरी प्रिये पारो बहुत बहुत प्यार!! मैं देवदास हूँ, सब कुशल-मंगल है, आशा करता हूँ कि तू भी कुशल ही होगी। चुन्नीलाल कल मदिरालय में मिला था, मुझसे कह रहा था कि पारो हारवर्ड कालेज पढने लंदन जा रही है। सुनकर मुझे बहुत दुःख हुआ, और इसी दुःख में बहुत सारा म...
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आलोक कुमार
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[08 Oct 2009 13:39 PM]



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