आज तिमिर का नाश हुआ.....

चंद मुट्ठी अशआर आज तिमिर का नाश हुआ दीपों की लगी कतार कार्तिक अमावस्या लेकर आई यह आलोकित उपहार द्वार द्वार पर दीप जलें घर घर हुआ श्रृंगार हर देहरी प्रदीप्त हुई बिखरा हर्ष अपार झाड़ बुहार आँगन को लक्ष्मी को दें आमंत्रण करबद्ध हो सब करें मन से रमा का वंदन सभी को शुभ द... [पूरी पोस्ट]
writer dushyant
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[14 Oct 2009 10:18 AM]

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