दीप-पीड़ा

जीवन के पदचिन्ह कभी-कभी ऐसा भी होता है, जिंदगी के रोज़ बदले चेहरों में, चुपचाप जलते दीप के नीचे खामोश पनपते अंधेरों में | मांगता हैं कोई, मौन ही अपना अंश का खोया प्रकाश, बाँटकर चहूँ ओर रश्मि-उल्लास| फिर देखकर अपना नीड़ निराश, सोचता है अनवरत निर्विकार देकर ... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)
views
22
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
0
[06 Oct 2009 14:00 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix