।।संस्मरणात्मक श्रद्धांजलि।।

स्मृति-दीर्घा ... टिटहरी टिट टिट करती कभी बादलों से कहती सुनो ..सुनो... चित्रकार नहीं रहा, तो कभी पेड़ के नीचे बिल में पैर पसारे साँप से कहती....मालूम है चित्रकार चला गया..... , तो कभी दरख्त की शाख पर बैठ टिटियाती.... अरे देखो... वह चला गया, लेकिन मुझे मालूम क्यों नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer Rati
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[11 Oct 2009 00:34 AM]

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