मन रे तू काहे ना धीर धरे..... करवा चौथ-- बनाम सातवां जन्म
नहीं, मैं यहां आपको ये गीत नहीं सुनवा रहा हूं. ना ही अपनी आवाज़ में , ना ही रफ़ी जी के स्वार्गिक स्वर में.मैं तो आज बडा ही खुश हूं , मूड में हूं , क्योंकि आज का दिन बडा ही भाग्यशाली दिन है,जो पूरा खुशनुमा गुज़रता है, और पत्नी की तरफ़ से कोई रिस्क नहीं हो...
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दिलीप कवठेकर
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[08 Oct 2009 23:17 PM]



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