जीवन तो यूं भी चलता रहता है

बेदखल की डायरी जानती हूं एक दिन तुम यूं नहीं होगे मेरी जद में एक दिन तुम पांव उठा अपनी राह लोगे जीवन तब भी वैसा ही होगा जैसा तब हुआ करता था जब तुम छूते नहीं थे मुझे वैसे ही उगेगा सूरज बारिश की बूंदें भिगोएंगी तुम्‍हारे बाल पेड़ों के झुरमुट में अचानक खिल उठेगा कोई ब... [पूरी पोस्ट]
writer मनीषा पांडे
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[08 Oct 2009 15:04 PM]

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