खून, नदी और उस पार

बेदखल की डायरी उन तमाम लड़कियों के लिए जिनके सपनों में इतने अनंत रंग थे जितने धरती पर समाना मुश्किल है, लेकिन जिनके सपनों पर इतने ताले जड़े थे, जो संसार की सारी अमानवीयताओं से भारी थे। तुम जो भटकती थी बदहवास अपने ही भीतर दीवारों से टकराकर बार-बार लहूलुहान होती अपने... [पूरी पोस्ट]
writer मनीषा पांडे
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[12 Oct 2009 04:26 AM]

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