एहसासों की छुवन ~~

TRUTH (Collection of my poems) धूल के मानिन्द दिग्भ्रमित से उड़ते रहे एहसास मेरे, चूर-चूर हो रहे हर पल; हर क्षण विश्वास मेरे. तुम इन्हें गर अपने एहसासों की छुवन से भीगो दो तो शायद इन्हें इनका ठांव मिल जाये दूर हो भटकन इनकी गर भोर की उजास लिये इन्हें इनका गांव मिल जाये ~~~... [पूरी पोस्ट]
writer M VERMA
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[08 Oct 2009 20:10 PM]

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