उपन्यासों में जनवादी चेतना
सामाज वस्तुतः ऐसे वर्गों से बनता है जो किन्हीं निश्चित प्रयोजनों के लिए एक दूसरे के संपर्क में आते हैं. अर्थात् समाज व्यक्तियों के पारस्परिक संबंधों की व्यवस्था है. आज समाज विभिन्न स्तरों अर्थात् आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक के साथ साथ...
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गुर्रमकोंडा नीरजा
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[08 Oct 2009 04:46 AM]



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