हँसता हुआ आया ....
हँसता हुआ आया / वन में ललित वसन्त वसंत पंचमी। सूरज ने करवट बदली। कुहासे ने रजाई तहाई। भरपूर अंगड़ाई लेकर धरती जाग उठी। दुबक कर सोए उसके अद्भुत रूप की छ्टा जो फैली तो सारी प्रकृति अपने समस्त साधनों से उसके सिंगार में जुट गई। रंग छलके पड़ते हैं, पेड़ों, प...
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कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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[11 Oct 2009 18:20 PM]



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