करवा चौथ का चाँद ढूँढ़ते लिखी पंक्तियाँ
चाँद निकला इस जहां में,जाने कितनी बार मैं भी जीया और मरा हूँ ,जाने कितनी बार ऐसे अफ़साने बने हैं , जाने कितनी बार जिनपे रोया चाँद होगा जाने कितनी बार ये खुशी और ग़म मिला है , जाने कितनी बार चांदनी चुभती लगी है, जाने कितनी बार जिंदगी ऐसी कितनी कटी हैं...
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WindEnergyMan
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[07 Oct 2009 12:37 PM]



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