प्रणय - शतक (प्रेमानुभूति का काव्य) - चंद्रभान भारद्वाज

bhardwaj'sblog १) मेरे दिल को धडकना सिखाया तूने, मेरे सपनों को उड़ना सिखाया तूने; मैं तो अनजान था प्यार के नाम से, प्यार का पाठ पढ़ना सिखाया तूने। (२) आज तू मेरे मन का विषय बन गई, मेरे चिंतन मनन का विषय बन गई; प्यार की एक पुस्तक जो मन में लिखी, तू गहन अध्ययन का विष... [पूरी पोस्ट]
writer chandrabhan bhardwaj
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[12 Oct 2009 09:07 AM]

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