जिंदगी
रुक रही है ,थम रही है , रही है पर कम रही है , रही रेगिस्तान सी है , बूँद जैसी नम रही है , ज़िन्दगी ऐसी रही वैसी रही है // रौशनी है पर जरा कम , जोश है पर नहीं है दम , कौन जूझे इस अनय से , कौन ठोके रोज ही ख़म ? जिंदगी जैसी मिली वैसी रही है // टूट कर जु...
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डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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[06 Oct 2009 02:11 AM]



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