गीत
हमने अब तक सब कुछ पाया है मन के अनुरूप , फिरभी हम को कम लगती अपने हिस्से की धूप , चन्दन के वन खोजे तो सापों के दंश मिले , मर्यादा चाही फिर भी &n...
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डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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[08 Oct 2009 22:32 PM]



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