चित्रकारी कोहबर की
बिहार के मिथिला तथा सम्पूर्ण मैथिली समाज में शादी के मंडप के साथ-साथ कोहबर का भी बड़ा हीं महत्व है। कोहबर ही वह जगह होती है जहां शादी की रात दुल्हे के द्वार लगने से पहले तक दुल्हन गौरी मां की पूजा करती है। गणपति जी की चित्रकारी से शुरु होकर तरह-तरह क...
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pritima vats
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[06 Oct 2009 07:00 AM]



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