मुरली तेरा मुरलीधर 23
मुख मन अन्तर श्वाँस श्वाँस सब सच्चामय कर दे मधुकर सच्चा प्रेम सार जग में कुछ और न सार कहीं निर्झर जागृति स्वप्न शयन में तेरे बजे अखण्ड वेणु उसकी टेर रहा अनवरतगुंजिता मुरली तेरा मुरलीधर।।126।। जो कर रहा प्राणधन तेरा...
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हिमांशु । Himanshu
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[06 Oct 2009 23:56 PM]



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