मुरली तेरा मुरलीधर 25

अखिलं मधुरम् भेंट सच्चिदानन्द ईश को मुक्त प्रभंजन में मधुकर सत निर्मल आकाश पवन चित नित तेजानन्द सतत निर्झर विविध वर्णमयि विश्व वस्तुयें प्रियतम का रंगालेखन टेर रहा है चित्रमालिनी  मुरली  तेरा    मुरलीधर।।136।। सच्चा संस्तुत अपरिग्रह ही श्... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu
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[10 Oct 2009 21:06 PM]

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