मुरली तेरा मुरलीधर 26
देख शरद वासंती कितने हुए व्यतीत दिवस मधुकर काल श्रृंखलाबद्ध अस्त हो जाता भास्वर रवि निर्झर भग्न पतित कमलों की परिमल सुरभि उड़ा ले गया पवन टेर रहा है कालविजयिनी मुरली तेरा मुरलीधर।।141।। मूढ़ जुटाता रहा मनोरथ के निर्गंध सुम...
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हिमांशु । Himanshu
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[12 Oct 2009 22:00 PM]



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