डर क्यूँ है?

TAPASHWANI अकेला ही चला था, साथ अपनो का तज के| जो मेरे साथ न था, फिर उससे शिकायत क्यूँ है? जब मैं यहाँ हर मोड़ पर, अपनो से बचता आया हूँ| आज इस मोड़ पर , अपनों कि जरूरत क्यूँ है? जब नहीं सोचा कि, अंजाम क्या होगा इसका | आज उसी सोच से, आनंद मुझे घिन्न क्यूँ है? छु... [पूरी पोस्ट]
writer Tapashwani Anand
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[06 Oct 2009 03:53 AM]

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