समय की तूलिका से........!

कलरव जीवन का एक-एक पल समय की तूलिका से रच रहा अप्रतिम इतिहास जब भी पलट कर देखता हूं नित अधुनातन हो रहा अतीत की एक-एक ईंट से चुनी दीवारों पर अरमानों के छ्त न जानें कब पड़ेंगे विचारों के कपाट संवेदनाओं के वातायन कहीं ढूंढते ने फिरें अपनी पहचान को यही सोच कर... [पूरी पोस्ट]
writer हेमन्त कुमार
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[11 Oct 2009 19:58 PM]

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