मेरे अन्दर एक नयी शक्ति का वास है, कुछ भी कर सकना अब मेरे बस कि बात है..
सपनों कि मंज़िल तक पहुँचने कि ख़्वाहिश है, पर रास्तों में कांटो की बारिश है, किस कदर अपने क़दमों को रोकूँ मैं? इधर कुआँ, तो उधर खाई नज़र आई है. ख़्वाहिश तक पहुँचने की ख़्वाहिश, दिल में दब गयी ऐसा लगा, सपनों को हकीकत में बदलने क...
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महफूज़ अली
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[08 Oct 2009 05:03 AM]



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