कॉन्ट्राडिक्शन- 5
उन दिनों में मां होना चाहता था और छत के पंखे के नीचे पसीने के तर तकिये को भूलकर घंटों दुनिया से बेहोश रहता था... दिमाग बाकी जिस्म से अलग होकर कहीं तैरने चला जाता था, या लगता था कि सिर्फ दिमाग सो गया है... बाकी बेहोश जिस्म देर तक जिंदा रहता था... और फ...
[पूरी पोस्ट]
देवेश वशिष्ठ ' खबरी '
14
0
0
0
1
[14 Oct 2009 10:12 AM]



Shuffle








