मेरे जज़्बात तुम बिन कम न होते
मेरे जज़्बात तुम बिन कम न होते। ख़ुशी से रूबरू पर हम न होते। रुतें आतीं तेरे बिन भी जहां में, बहारों के मगर मौसम न होते। कभी ना रंगे-उल्फ़त देख पाता, अगर इस दिल के तुम हमदम न होते। ख़लाओं में भटकती ज़ीस्त तुम बिन, किसी मंज़िल के राही हम न होते। शुआ-ए-रुख...
[पूरी पोस्ट]
प्रताप नारायण सिंह
6
0
0
0
0
[06 Oct 2009 06:09 AM]



Shuffle








