दिल लगाने से हम तो डरते हैं
दिल लगाने से हम तो डरते हैं । ग़म उठाने से हम तो डरते हैं । कुछ भरम दिल के टूट ना जाएँ , आज़माने से हम तो डरते हैं । कब किसी बात का हो अफ़साना, इस ज़माने से हम तो डरते हैं । फिर रुला दें तुझे न वे नग्में, गुनगुनाने से हम तो डरते हैं । हो न जाओ सनम! क...
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प्रताप नारायण सिंह
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[14 Oct 2009 10:11 AM]



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