काबुलीवाला कहता है

जो देखा भूलने से पहले मौसम तो जैसा है ठीक ही है गरमी हो या सर्दी पतझर हो या बरसात अगर में जग जाऊँ तो अच्छा है पता नहीं पर दिल्ली में सब सो रहे हैं यह कैसा अनाम मौसम, पता नहीं वे किसके पैर हैं जिन्हें दिखता नहीं कहते हैं अमरीका के पाँव दबाए जा रहे हैं दिल्ली में सब सो रहे... [पूरी पोस्ट]
writer मोहन राणा - Mohan Rana
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[08 Oct 2009 09:02 AM]

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