प्रणाम गुरुवर आपके जन्मदिन पर आपको
सुबह जैसे ही उनीदीं सी आँख खुली उल्लास और हर्ष जैसे मेरे कमरे में पसरे हुए थे , खामोशी और बोरियत पता नही कहाँ दुबक गए थे , सोचा तो था के रात में ही कॉल कर के जन्म दिन की बधाई दूँ फ़िर कहा ये सही नही होगा । सुबह कॉल किया तो बीजी मिला कॉल इतने में कल खर...
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"अर्श"
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[11 Oct 2009 13:18 PM]



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