बिस्तर में सिमटे हुये प्रश्न

कवितायन क्यों? देर रात घर लौटने के बाद भी मन उदिग्न रहता है और बिस्तर में भी वो सारे प्रश्न जिनके उत्तर मैं खोज नही पाया आजतक दग्ध करते हैं क्यों? ऐसा लगता है कि काश यह रात ना होती तो मैं ठहरता नही खोजता समाधानों को / आजमाता और लिख पाता कोई कहानी नई वो सारे... [पूरी पोस्ट]
writer मुकेश कुमार तिवारी
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[07 Oct 2009 04:29 AM]

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