मैं, पहले तो ऐसा ना था

कवितायन यह वाकिया एक न्यूरोसाईकेट्रिक फिजिशियन के क्लीनिक को विजिट करने पर जो कुछ देखा था/महसूस किया था वो सब आपके सामने है। मुझे भी ऐसा लगने लगा है कि इस आपा-धापी के युग में हमारी संवेदनायें मरती जा रही हैं और हम केवल अपने में ही सिमट रहे हैं :- वो, लड़की अक... [पूरी पोस्ट]
writer मुकेश कुमार तिवारी
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[13 Oct 2009 03:03 AM]

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