आहा जिंदगी
पहला अध्याय नई फ्राक मिली कचनार के फूलों से लदी डाली पर गिलहरी-सी ठुमक-घुमक उठी जन्नत मुट्ठी में जमीन आसमान पर दूसरा अध्याय दुपट्टा ओढ़ा नजरें जैसे सारी उसी पर सपनों के सीप भरे-भरे से किसी सुनहरे रथ के इंतजार में इंतजार की सड़क छोटी थी तीसरा अध्याय ब...
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वर्तिका नन्दा
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[12 Oct 2009 08:33 AM]



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