पुष्पा भारतीजी कहानी का एक पहलू यह भी है

शैशव आपातकाल की औपचारिक घोषणा के पहले भी सत्ता प्रतिष्ठान द्वारा पत्र-पत्रिकाओं पर नकेल कसना शुरु हो चुका था । सेन्सरशिप न होने के बावजूद सरकारी विज्ञापन और अखबारी कागज के कोटे आदि के द्वारा यह अंकुश रखा जाता । इसी दौर का एक प्रसंग बता रहा हूँ । धर्मवीर भ... [पूरी पोस्ट]
writer अफ़लातून
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[06 Oct 2009 23:24 PM]

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